मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में 5 फरवरी को हुए भीषण खदान विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर दिया। एक अवैध रैट-होल कोयला खदान में हुए धमाके में कम से कम 16 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई गई। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि वर्षों से चल रही अवैध और असुरक्षित खनन गतिविधियों की भयावह सच्चाई को उजागर करता है।
📍 हादसा कैसे हुआ?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस खदान में विस्फोट हुआ वह कानूनी अनुमति के बिना संचालित की जा रही थी। खदान के अंदर गैस जमाव, असुरक्षित खुदाई और वैज्ञानिक तरीकों की कमी को संभावित कारण माना जा रहा है। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि अंदर काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
राहत और बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर अभियान चलाया, लेकिन संकरी सुरंगों और अस्थिर जमीन के कारण काम बेहद जोखिम भरा रहा।
⛏ रैट-होल माइनिंग क्या है और क्यों खतरनाक है?
रैट-होल माइनिंग एक पारंपरिक लेकिन बेहद खतरनाक खनन पद्धति है, जिसमें जमीन के अंदर बेहद संकरी सुरंगें बनाई जाती हैं — इतनी छोटी कि मजदूरों को झुककर या रेंगकर अंदर जाना पड़ता है।
इस पद्धति की सबसे बड़ी समस्याएँ:
- ❌ उचित वेंटिलेशन (हवा का प्रवाह) नहीं
- ❌ गैस विस्फोट का खतरा
- ❌ सुरंगों के धंसने की संभावना
- ❌ सुरक्षा उपकरणों की कमी
- ❌ आपातकालीन निकास का अभाव
यही कारण है कि इस तरह की खदानों में काम करना हर दिन मौत से खेलने जैसा होता है।
⚖️ प्रतिबंध के बावजूद क्यों जारी है अवैध खनन?
मेघालय में रैट-होल माइनिंग पर वर्षों पहले प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद यह गतिविधि पूरी तरह बंद नहीं हो पाई है।
इसके पीछे कई वजहें मानी जाती हैं:
- 💰 स्थानीय स्तर पर कोयले की अवैध मांग
- 👷 गरीब मजदूरों की मजबूरी
- 🌄 दुर्गम इलाके, जहां निगरानी मुश्किल
- 🚫 नियमों का कमजोर क्रियान्वयन
इन परिस्थितियों में अवैध खदानें छिपकर चलती रहती हैं — जब तक कोई बड़ी दुर्घटना सामने न आ जाए।
👷 मजदूरों की जिंदगी: जोखिम और मजबूरी
इन खदानों में काम करने वाले अधिकांश मजदूर आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पास न तो स्थायी रोजगार होता है और न ही सामाजिक सुरक्षा। परिवार का पेट पालने के लिए वे ऐसे खतरनाक काम करने को मजबूर हो जाते हैं।
बिना सुरक्षा उपकरण, बिना बीमा और बिना प्रशिक्षण — वे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
🌱 पर्यावरण पर भी गहरा असर
अवैध रैट-होल खनन सिर्फ जानलेवा नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद हानिकारक है:
- पहाड़ियों का कटाव
- जंगलों की क्षति
- नदियों और जलस्रोतों का प्रदूषण
- मिट्टी की उर्वरता में गिरावट
इसका असर आने वाली पीढ़ियों तक पड़ता है।
🚨 प्रशासन की कार्रवाई
हादसे के बाद प्रशासन ने:
- बचाव अभियान शुरू किया
- मामले की जांच के आदेश दिए
- अवैध खनन से जुड़े लोगों की पहचान की प्रक्रिया शुरू की
अब सबसे बड़ा सवाल है — क्या इस बार जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा?
❓ यह त्रासदी हमें क्या सिखाती है?
यह हादसा सिर्फ एक खदान विस्फोट नहीं, बल्कि एक सिस्टम की विफलता का प्रतीक है।
जरूरी कदम:
✔ अवैध खनन पर सख्त निगरानी
✔ वैकल्पिक रोजगार के अवसर
✔ मजदूर सुरक्षा कानूनों का पालन
✔ आधुनिक और सुरक्षित खनन तकनीक का उपयोग
जब तक ये कदम जमीन पर लागू नहीं होते, ऐसी त्रासदियाँ दोहराए जाने का खतरा बना रहेगा।
🕯 निष्कर्ष
पूर्वी जयंतिया हिल्स की यह दुर्घटना हमें याद दिलाती है कि विकास और आर्थिक लाभ के पीछे मानव जीवन की कीमत नहीं चुकाई जानी चाहिए। जो मजदूर इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठे, वे सिर्फ आंकड़े नहीं थे — वे परिवारों का सहारा थे।
अब जरूरत है कि यह हादसा बदलाव की शुरुआत बने, न कि सिर्फ एक और दुखद खबर बनकर रह जाए।
